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क्या उन्हें फिर से मोहब्बत है?

ये मेरे दिल तू धड़कना बंद हो जा,जिसे तू न पसंद वहां वापस मत जा। ये मेरे पलके तू आँखों को कफ़न दे,तेरे आँशु को बेबजह कुर्बानी मत दे। ये रात तू उनसे पूछसपनो में आने की वजह क्या है,क्या उन्हें हमें फिर से मोहब्बत है?

मेरे हिस्से का प्यार

मेरे हिस्से का प्यार तेरे क़ब्र में ही दफ़न आया,तेरे मेरे प्यार की हर जख्मो को वही भूल आया। तेरी प्यार की बढ़ती दूरियां न कभी समझ में आया,न हम मिले, न हमारा मंजिल मिला, न प्यार मिला। I came buried the my love in your grave,I forgot every wound of my love for you.... Continue Reading →

द्विफौक्सी जीवन

द्विफौक्सी जीवन में हर चीज़ का दो पहलू होता हैं, यह देख लो जो मांझा पतंग को उडाता है, वही मांजा काटता भी हैं,कभी हम जनाज़े को कंधे देते हैं, कभी हम ही जनाज़ा में होते हैं,करवा चौथ के दिन एक सुहागन "सफ़ेद" चाँद की इंतजार करती हैं,और पति की मातम में वही "सफ़ेद" साड़ी... Continue Reading →

बेबसी

पास और दूर के बिच का फ़ासला,सांझ की वो लाली किरण और समंदर की पानी के बिच के रिश्ते जैसे होती हैं,वो पास, पास में होते हुए भी नहीं होता हैं, और वो दूर दूरियां लगने लगता हैं।बेबसी ऐसी अपनी,बेतरित की जिंदगी अब एक ऐसा अफ़साना सा लगने लगा हैं,तेरे पास हो कर भी, तेरे... Continue Reading →

ମରୁଭୂମିର ମରୀଚିକା

(୧) ବେଳାଭୂମିରୁ ଦୂର ଦିଗବଳୟରେ ଦିଶୁଥିବା ଆକାଶ ଆଉ ସାଗରର ଏକାକାରର ଦୃଶ୍ୟରେ ଦୂରତା ଠିକ ଯେତିକି ତୁମ ଆଉ ମୋ ଭିତରେ ଦୂରତା ଠିକ ସେତିକି। (୨) ଏକାପରି ଶୁଭୁଥିବା ଗେଟୱେ ଅଫ ଇଣ୍ଡିଆ ଏବଂ ଇଣ୍ଡିଆ ଗେଟ ଭିତରେ ସମାନତା ଠିକ ଯେତିକି ତୁମ ଆଉ ମୋ ଭିତରେ ସମାନତା ଠିକ ସେତିକି। (୩) ଗାଧୁଆ ତୁଠର ଅଳତା ହଳଦୀ ବୋଳା ପଥର ଏବଂ ରୋଷେଇ ଘରେ ଲଙ୍କା ହଳଦୀ ଆଦିର ବେସର ପ୍ରସ୍ତୁତ... Continue Reading →

ମୁଠାଏ ଅତୀତ

ମୁଠାଏ ଅତୀତ ମୁଠାଏ ଅତୀତକୁ ନିଜ ଉପରକୁ ଫିଙ୍ଗି ଦେଖିଲି କିଛି ଲୋମ ଟାଙ୍କୁରିଉଠିବାର ସ୍ପର୍ଶ ଦେଇ ଗଲେ ତ କିଛି ଗୋଧୂଳିର ପ୍ରଥମ ବର୍ଷାର ବାସ୍ନା ପରି ମହକ। ଏଇତ ଜୀବନ, କିଛି ହସ କିଛି ଲୁହ ର ଖତିୟାନ। ମୁଠାଏ ଅତୀତକୁ ପୁରୁଣା ଡାଏରୀ ରୁ ପଢି ବସିଲି ପୃଷ୍ଠା ପରେ ପୃଷ୍ଠା ଲେଉଟାଇଗଲି କିଛି ରାଗ କିଛି ଅଭିମାନ ର ସମୁଚୟ। ଠିକ ସମୁଦ୍ରର ସେଇ ଜୁଆର ଆଉ ଭଟ୍ଟା ପରି। ମୁଠାଏ... Continue Reading →

From an Anganwadi cook to Lok Sabha MP to getting trolled in Gossip: the Unbecoming of a Society

କହିଲା ଜାତିର କାନେ କାନେ, ଉଠିବୁ ଆଉ ତୁ କେତେ ଦିନେ,ପୂରୁବ ଗୌରବ ପୂରୁବ ମହିମା, ପଡୁ ନାହିଁ କିରେ ତୋର ମନେ ।ରଚନା - ଉତ୍କଳ ଗୌରବ ମଧୁସୁଦନ ଦାସ The sacred land of Jagannath, the state of Odisha, is well known for its rich cultural heritage, its religious importance, and its contribution to build a modern-day India. Since the era of... Continue Reading →

घर – भूख – आँसू

सरहद पार सिपाही धुप में चाहे कितने बार पानी पिला लिए हो,पर अपने बन्दूक के गोली में उसीका ही नाम लिखी होती है!कहने केलिए चार दीवार तो मेरे हॉस्टल रूम में भी है,चार दीवार उस रेस्तोरां में भी है जहाँ हम हर रोज खाने जाते है!पेट भरने केलिए, सुस्त रहने केलिए, खा तो लेते है... Continue Reading →

ମୋତେ ମୁଁ ହୋଇ ରହିବାକୁ ଦିଅ

ମୁଁ ମନ ଖୁସି ରେ ହଲିଝୁଲି ଚାଲୁଥିଲି, ତୁମେ କହିଲ. ମୁଁ କାଳେ ପିଇବା ଶିଖିଲିଣି || ମୁଁ ଯେବେ ରାସ୍ତାରେ ସିଧା ଚାଲିବା ଆରମ୍ଭ କଲି, ତୁମେ କହିଲ, ପିଇ ଚାଲିବାର ଅଭ୍ୟାସ ହେଇଗଲାଣି || ଆମର ଯେବେ ଦେଖା ହେଲା, ମୁଁ ବ୍ୟସ୍ତ ଥିଲି, ତମେ କହିଲ, ତୁ ବଡ ଲୋକ ହେଇଗଲୁଣି || ହେଲା କି, ମୁଁ ତୁମ ମନ କଥା ବୁଝିଲିନି, ତମେ ବି ତ ଚେଷ୍ଟା କଲନି...|| ତମେ ଦେଖିବାକୁ... Continue Reading →

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